✒️ कवि परिचय :
कवि – केदारनाथ सिंह
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जन्म : 7 जुलाई 1934 ई. को उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के चकिया गाँव में।
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निधन : 19 मार्च 2018 ई. को दिल्ली में।
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ये ‘नयी कविता’ आंदोलन के प्रमुख कवि रहे।
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इनकी कविताओं में गाँव–कस्बों का जीवन, लोक संस्कृति, समय की संवेदनाएँ और मनुष्य की पीड़ा–करुणा का चित्रण मिलता है।
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भाषा अत्यंत सहज, बोलचाल की, किंतु गहन संवेदनशील।
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प्रमुख कृतियाँ :
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कविता संग्रह – अब भी, ज़मीन पक रही है, यहाँ से देखो, बाघ, अकाल में सारस, उत्तर-कबीर।
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इन्हें ज्ञानपीठ पुरस्कार (2013) से भी सम्मानित किया गया।
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✒️ कविता परिचय :
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‘बनारस’ कविता में कवि ने बनारस की जीवन-धारा, वहाँ के वातावरण, संस्कृति, लय और धीमे-धीमे घटने वाली घटनाओं का चित्रण किया है।
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‘दिशा’ कविता में कवि ने प्रकृति और बच्चों के माध्यम से जीवन की जिज्ञासा और सत्य की खोज को व्यक्त किया है।
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दोनों कविताएँ मानव–संवेदनाओं और जीवन के गहरे अर्थों को उद्घाटित करती हैं।
✨ प्रश्नोत्तर (NCERT/राजस्थान बोर्ड अनुसार)
बनारस
प्रश्न 1. बनारस में बसंत का आगमन कैसे होता है और उसका क्या प्रभाव इस शहर पर पड़ता है?
उत्तर : बनारस में बसंत का आगमन धीरे–धीरे होता है। जैसे कोई हल्की–सी आहट हो और पूरा शहर उसमें डूब जाए। इसका प्रभाव यह पड़ता है कि वातावरण में एक सामूहिक लय और उल्लास भर जाता है, पूरा शहर एक साथ ऋतु–परिवर्तन का आनंद लेने लगता है।
प्रश्न 2. ‘खाली कटोरों में बसंत का उतरना’ से क्या आशय है?
उत्तर : इसका आशय है कि बनारस के जीवन में साधारण और छोटी–छोटी वस्तुओं में भी ऋतु का सौंदर्य और उल्लास उतर आता है। यहाँ तक कि खाली बर्तन भी जीवन्त हो उठते हैं।
प्रश्न 3. बनारस की पूर्र्णता और रिक्तता को कवि ने किस प्रकार दिखाया है?
उत्तर : कवि ने दिखाया है कि बनारस की पूर्र्णता उसके जीवन की गति, साधारणता और संस्कृति में है, वहीं रिक्तता उसके खाली बर्तनों, गली–कूचों और स्थिर जीवन में झलकती है। दोनों मिलकर शहर की विशेष पहचान बनाते हैं।
प्रश्न 4. बनारस में धीरे–धीरे क्या–क्या होता है? ‘धीरे–धीरे’ से कवि इस शहर के बारे में क्या कहना चाहता है?
उत्तर : बनारस में ऋतुओं का परिवर्तन, जीवन की गति, लोगों की गतिविधियाँ सब धीरे–धीरे होती हैं। कवि कहना चाहता है कि बनारस एक ऐसा शहर है जो समय के साथ धीमे–धीमे चलता है और उसी में उसकी सुंदरता है।
प्रश्न 5. धीरे–धीरे होने की सामूहिक लय में क्या–क्या बँधा है?
उत्तर : इसमें ऋतु का परिवर्तन, लोगों की दिनचर्या, गली–कूचों की गति, यहाँ तक कि नदी का बहाव भी बँधा है।
प्रश्न 6. ‘सई साँझ’ में घुसने पर बनारस की किन–किन विशेषताओं का पता चलता है?
उत्तर : इससे ज्ञात होता है कि बनारस का जीवन बहुत साधारण होते हुए भी गहरे अर्थों से भरा है। शाम का वातावरण इस शहर को एक अलौकिक सौंदर्य और शांति से भर देता है।
प्रश्न 7. बनारस शहर के लिए जो मानवीय क्रियाएँ इस कविता में आई हैं, उनका व्यंजनाार्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : कवि ने बनारस को मानवीय रूप में प्रस्तुत किया है। शहर का ‘धीरे–धीरे होना’, ‘खाली कटोरों में बसंत का उतरना’ आदि मानवीकरण हैं, जो इस नगर की जीवन्तता को प्रकट करते हैं।
प्रश्न 8. शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –
(क) ‘यह धीरे–धीरे होना …… समूचे शहर को’
➡️ यह पंक्ति पूरे शहर के वातावरण में व्याप्त सामूहिक लय को व्यक्त करती है।
(ख) ‘अगर ध्यान से देखो …… और आधा नहीं है’
➡️ यह पंक्ति शहर की अपूर्णता और पूर्णता दोनों को दिखाती है, जिससे जीवन का संतुलन झलकता है।
(ग) ‘अपनी एक टांग पर …… बेखबर’
➡️ यह पंक्ति सारस के चित्रण के माध्यम से शहर की अलसाई, स्थिर और शांत गति का बिंब प्रस्तुत करती है।
दिशा
प्रश्न 1. बच्चे का उधर–उधर कहना क्या प्रकट करता है?
उत्तर : यह बच्चे की सहज जिज्ञासा, अज्ञानता और खोज–भावना को प्रकट करता है। वह दिशा को लेकर असमंजस में है और अपने ढंग से उत्तर देता है।
प्रश्न 2. ‘मैं स्वीकार करूँ मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है’ – प्रस्तुत पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : कवि स्वीकार करता है कि बच्चे की सहज बात से उसे भी यह ज्ञान हुआ कि दिशा और सत्य की खोज सरल नहीं है। बच्चे की मासूम जिज्ञासा ने कवि को भी नया दृष्टिकोण दिया।