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कक्षा - 12 बिस्कोहर की माटी ncert प्रश्न-उत्तर

पाठ परिचय: 'बिस्कोहर की माटी'

'बिस्कोहर की माटी' हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक विश्वनाथ त्रिपाठी द्वारा लिखित एक आत्मकथात्मक निबंध है। यह पाठ लेखक के बचपन और किशोरावस्था से जुड़ी स्मृतियों, अनुभवों और बिस्कोहर नामक उनके गाँव के परिवेश का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करता है। लेखक ने बड़े ही सहज और आत्मीय तरीके से अपने गाँव की मिट्टी, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों, लोक-संस्कृति, पारिवारिक संबंधों और जीवन के छोटे-छोटे क्षणों को याद किया है। यह पाठ प्रकृति के साथ मनुष्य के गहरे जुड़ाव और बचपन की मासूमियत को दर्शाता है।

पाठ का उद्देश्य:

'बिस्कोहर की माटी' पाठ के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. ग्राम्य जीवन का चित्रण: शहरीकरण के दौर में ग्रामीण जीवन, उसकी सादगी, चुनौतियाँ और सुंदरता को पाठकों के समक्ष प्रस्तुत करना।

  2. प्रकृति से जुड़ाव: मनुष्य और प्रकृति के अटूट संबंध को रेखांकित करना तथा यह बताना कि कैसे प्रकृति हमारे जीवन को आकार देती है।

  3. स्मृति और Nostalgia: बचपन की मीठी यादों और बीते हुए कल के प्रति एक भावनात्मक लगाव (nostalgia) को जगाना।

  4. लोक संस्कृति का संरक्षण: ग्रामीण अंचलों में प्रचलित लोकगीतों, कहानियों, रीति-रिवाजों और लोक-ज्ञान को महत्व देना।

  5. संवेदनशीलता का विकास: पाठकों में अपने परिवेश, परिवार और अपनी जड़ों के प्रति संवेदनशीलता और प्रेम विकसित करना।

  6. साहित्यिक सौंदर्य: भाषा की सहजता, आत्मीयता और मार्मिकता के माध्यम से साहित्यिक सौंदर्य का बोध कराना।


NCERT प्रश्न-उत्तर (कक्षा-12 हिंदी साहित्य, पाठ-2 बिस्कोहर की माटी, राजस्थान बोर्ड):

यहाँ पाठ में दिए गए प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में प्रस्तुत हैं:

  1. कोइयाँ किसे कहते हैं? उसकी विशेषताएँ बताइए।
    कोइयाँ एक प्रकार का जलीय पौधा होता है, जो तालाबों और पानी में उगता है। इसकी पत्तियाँ कमल जैसी गोल और हरी होती हैं। इसकी विशेषता है कि यह पानी की गंदगी को साफ करता है, इसके फूल सफेद, गुलाबी या लाल रंग के होते हैं, जो अत्यंत सुंदर लगते हैं। इसकी जड़ें, तना और बीज औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं।

  2. ‘बच्चे का माँ का दूध पीना सिर्फ दूध पीना नहीं, माँ से बच्चे के सारे संबंधों का जीवन-चरित होता है’ – टिप्पणी कीजिए।
    यह कथन अत्यंत मार्मिक और गहरा अर्थ लिए हुए है। माँ का दूध सिर्फ बच्चे की शारीरिक भूख शांत नहीं करता, बल्कि यह माँ और बच्चे के बीच एक भावनात्मक सेतु का काम करता है। यह प्रेम, सुरक्षा, दुलार और अपनत्व का प्रतीक है। दूध पीते समय बच्चा माँ के स्पर्श, गंध और आवाज़ से जुड़ता है, जो उसके पूरे जीवन के लिए एक मजबूत भावनात्मक नींव रखता है। यह संबंध केवल पोषण तक सीमित न होकर, जीवन भर के गहरे लगाव और अटूट बंधन का आधार बनता है।

  3. बिसनाथ पर क्या अत्याचार हो गया?
    लेखक बिसनाथ पर बचपन में बिच्छू का डंक लगने का अत्याचार हुआ था। यह उस समय की एक सामान्य घटना थी, जब ग्रामीण परिवेश में बिच्छू, साँप जैसे जीव-जंतुओं का प्रकोप रहता था और उनका डंक लगना आम बात थी। यह घटना उनके बचपन की एक दर्दनाक स्मृति थी।

  4. गरमी और लू से बचने के उपायों का विवरण दीजिए। क्या आप भी उन उपायों से परिचित हैं?
    गरमी और लू से बचने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में कई पारंपरिक उपाय अपनाए जाते हैं। जैसे:

    • प्यास बुझाने के लिए: पानी, कच्ची कैरी का पन्ना, छाछ, नींबू पानी आदि का सेवन।

    • शरीर को ठंडा रखने के लिए: गीले कपड़े से शरीर पोंछना, ठंडे पानी से नहाना, ठंडी जगह पर रहना।

    • बाहर निकलने से बचना: दोपहर में कड़ी धूप में बाहर न निकलना।

    • कपड़े: सूती, ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनना।
      हाँ, मैं भी इन उपायों से परिचित हूँ, खासकर गर्मियों में पर्याप्त पानी पीना और हल्के कपड़े पहनना आज भी शहरों में भी प्रचलित है।

  5. लेखक बिसनाथ ने किन आधारों पर अपनी माँ की तुलना बतख से की है?
    लेखक ने अपनी माँ की तुलना बतख से उनकी चलने की शैली के आधार पर की है। वे बताते हैं कि उनकी माँ बिस्कोहर के खेतों में पानी भरे रास्तों पर बतख की तरह धीर-धीरे, सधे हुए कदमों से चलती थीं। यह तुलना माँ की सहनशीलता, धैर्य और ग्रामीण जीवन की कठिनाइयों में भी सहजता बनाए रखने की क्षमता को दर्शाती है।

  6. बिस्कोहर में हुई बरसात का जो वर्णन बिसनाथ ने किया है उसे अपने शब्दों में लिखिए।
    बिसनाथ ने बिस्कोहर में हुई बरसात का वर्णन अत्यंत सजीवता से किया है। वे बताते हैं कि बरसात से पहले की गर्मी और उमस बहुत असहनीय होती थी। फिर जब बादल घिरते थे, तो पूरा माहौल बदल जाता था। बिजली कड़कती थी, बादलों की गड़गड़ाहट सुनाई देती थी और तेज हवाएँ चलती थीं। पहली बूँदों के पड़ते ही मिट्टी की सौंधी खुशबू फैल जाती थी, जो मन को मोह लेती थी। बरसात होने पर चारों ओर हरियाली छा जाती थी, तालाब और गड्ढे पानी से भर जाते थे। बच्चे और बड़े सभी वर्षा का आनंद लेते थे, खासकर ग्रामीण जीवन में बरसात जीवनदायिनी होती थी।

  7. ‘फूल केवल गंध ही नहीं देते दवा भी करते हैं’, कैसे?
    यह कथन बिल्कुल सत्य है। फूल न केवल अपनी खुशबू और सुंदरता से मन को प्रसन्न करते हैं, बल्कि उनमें अनेक औषधीय गुण भी होते हैं। जैसे:

    • गुलाब: इसकी पंखुड़ियाँ गुलकंद बनाने, त्वचा रोगों में और ठंडक देने के लिए इस्तेमाल होती हैं।

    • गेंदा: इसके फूल एंटीसेप्टिक गुणों वाले होते हैं और चोट पर लगाए जाते हैं।

    • चमेली: इसके फूलों का तेल सिरदर्द और अनिद्रा में लाभकारी होता है।

    • कमल: इसके विभिन्न भाग आयुर्वेद में कई बीमारियों के इलाज में प्रयुक्त होते हैं।
      इस प्रकार, फूल प्राकृतिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  8. ‘प्रकृति सजीव नारी बन गई’ – इस कथन के संदर्भ में लेखक की प्रकृति, नारी और सौंदर्य संबंधी मान्यताएँ स्पष्ट कीजिए।
    यह कथन लेखक की प्रकृति के प्रति गहरी आत्मीयता और नारी सौंदर्य के प्रति उनकी सूक्ष्म दृष्टि को दर्शाता है। लेखक प्रकृति को केवल जड़ वस्तु नहीं, बल्कि एक सजीव, संवेदनशील सत्ता के रूप में देखते हैं, जो नारी के समान ही सुंदर, ममतामयी और जीवनदायिनी है। उनके लिए प्रकृति का सौंदर्य, नारी सौंदर्य से अभिन्न है। जिस प्रकार नारी में कोमलता, लालित्य, शक्ति और सृजन का गुण होता है, उसी प्रकार प्रकृति भी अपने विभिन्न रूपों में ये सभी गुण धारण करती है। यह मान्यता लेखक के प्रकृति और नारी के प्रति सम्मान और उनके गहन भावनात्मक जुड़ाव को उजागर करती है।

  9. ऐसी कौन सी स्मृति है जिसके साथ लेखक को मृत्यु का बोध अजीब तौर से जुड़ा मिलता है?
    लेखक को मृत्यु का बोध बिच्छू के डंक लगने और उसके असहनीय दर्द से जुड़ा मिलता है। बिच्छू के डंक लगने पर जो असह्य पीड़ा होती थी, वह इतनी तीव्र होती थी कि ऐसा लगता था मानो प्राण निकल जाएँगे। इस अनुभव ने उन्हें बचपन में ही मृत्यु के भयावह रूप का एक अजीब सा अहसास करा दिया था।
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