कक्षा - 11 घर की याद



कक्षा 11 (आरोह) - कविता: घर की याद

(कवि: भवानी प्रसाद मिश्र)

NCERT प्रश्न-उत्तर


कविता के साथ

प्रश्न 1. पानी के रात भर गिरने और प्राण-मन के घिरने में परस्पर क्या संबंध है?

उत्तर: पानी के रात भर गिरने और प्राण-मन के घिरने में गहरा और भावनात्मक संबंध है।

  • पानी का गिरना: सावन की रात में लगातार बारिश हो रही है, जिससे वातावरण में उदासी और सन्नाटा छा गया है।

  • प्राण-मन का घिरना: इस बारिश की बूँदों के साथ-साथ कवि का मन भी स्मृतियों से घिर गया है। बारिश की रिमझिम आवाज़ कवि की यादों को और गहरा कर देती है। जिस प्रकार बादल पानी से घिरे हैं, उसी प्रकार कवि का मन और प्राण घर की यादों से घिर गए हैं। यह बारिश कवि के एकाकीपन और दुख को और बढ़ा देती है, जिससे उनका मन घर की यादों में डूब जाता है।

इस प्रकार, बाहर बरसता पानी कवि के अंदर की भावनात्मक उथल-पुथल और उदासी का प्रतीक बन गया है।

प्रश्न 2. 'घर की याद' कविता में पिता के व्यक्तित्व की किन विशेषताओं को उकेरा गया है?

उत्तर: 'घर की याद' कविता में कवि ने अपने पिता के व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताओं को उकेरा है:

  1. स्वस्थ और उत्साही: उनके पिता बुढ़ापे में भी पूरी तरह स्वस्थ और ऊर्जावान हैं। वे आज भी दौड़ लगाते हैं, दण्ड-बैठक करते हैं और उनमें युवाओं जैसा उत्साह है। (पंक्ति: अभी भी दौड़ जाएँ, जो अभी भी खिलखिलाएँ।)

  2. साहसी और निडर: वे मौत या शेर से भी नहीं डरते। उनकी आवाज़ में बादलों जैसी गर्जना है और काम में तूफ़ान जैसी तेज़ी। (पंक्ति: मौत के आगे न हिचकें, शेर के आगे न बिचकें।)

  3. धार्मिक प्रवृत्ति: वे गीता का पाठ करते हैं और धार्मिक आस्था रखते हैं।

  4. देशभक्त: उन्होंने ही अपने बेटे (कवि) को देश-सेवा के लिए प्रेरित किया है। वे कवि के जेल जाने पर गर्व महसूस करते हैं, भले ही उन्हें आंतरिक रूप से दुख हो।

  5. भावुक और संवेदनशील: बाहर से कठोर दिखने वाले पिता अंदर से बहुत भावुक हैं। अपने पाँचवें बेटे (कवि) को याद करके उनकी आँखों में आँसू आ जाते हैं। (पंक्ति: पाँचवें का नाम ले कर, रो पड़े होंगे बराबर।)

  6. पारिवारिक स्नेह: वे अपने सभी बच्चों से बहुत प्रेम करते हैं और उन्हें "सोने पर सुहागा" कहते हैं।

प्रश्न 3. निम्नलिखित पंक्तियों में 'बस' शब्द के प्रयोग की विशेषताएँ बताइए-
मैं मज़े में हूँ सही है,
घर नहीं हूँ बस यही है,
किंतु यह बस बड़ा बस है,
इसी बस से सब विरस है।

उत्तर: इन पंक्तियों में 'बस' शब्द का प्रयोग चार बार हुआ है, और हर बार इसका अर्थ अलग और विशेष है। इसकी विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  • पहला 'बस': "घर नहीं हूँ बस यही है" - यहाँ 'बस' का अर्थ 'सिर्फ' या 'केवल' है। कवि कहना चाहता है कि बस एक छोटी सी बात है कि मैं घर पर नहीं हूँ।

  • दूसरा 'बस': "किंतु यह बस बड़ा बस है" - यहाँ पहले 'बस' का अर्थ है 'लाचारी' या 'विवशता'। कवि की यह छोटी सी कमी या दूरी एक बहुत बड़ी लाचारी बन गई है।

  • तीसरा 'बस': "बड़ा बस है" - यहाँ 'बस' शब्द दूसरे 'बस' के अर्थ (लाचारी) को और अधिक गहरा बना रहा है।

  • चौथा 'बस': "इसी बस से सब विरस है" - यहाँ 'बस' शब्द उस पूरी 'लाचारी' या 'असमर्थता' को दर्शाता है, जिसके कारण कवि का जीवन नीरस और दुखी हो गया है।

इस प्रकार, कवि ने एक ही शब्द 'बस' का अलग-अलग अर्थों (केवल, विवशता, नियंत्रण से बाहर) में प्रयोग करके अपनी पीड़ा की गहराई को बहुत ही कलात्मक ढंग से व्यक्त किया है।

प्रश्न 4. कविता की अंतिम 12 पंक्तियों को पढ़कर कल्पना कीजिए कि कवि अपनी किस स्थिति व मनःस्थिति को अपने परिजनों से छिपाना चाहता है?

उत्तर: कविता की अंतिम 12 पंक्तियों में कवि सावन से यह प्रार्थना करता है कि वह उसके परिवार वालों को उसकी वास्तविक स्थिति के बारे में न बताए। कवि निम्नलिखित स्थितियों और मनःस्थितियों को अपने परिजनों से छिपाना चाहता है:

  • मानसिक पीड़ा और अकेलापन: वह जेल में अकेला है और रात-रात भर जागता रहता है। वह अपने परिवार से दूर होने के कारण बहुत दुखी और बेचैन है। (पंक्ति: कहना मत कि मैं जागता हूँ, आदमी से भागता हूँ।)

  • शारीरिक कमज़ोरी: जेल के कष्टों और दुख के कारण वह शारीरिक रूप से कमज़ोर हो गया है।

  • उदासी और निराशा: वह अंदर से टूट चुका है, चुप रहता है और निराशा में डूबा हुआ है। (पंक्ति: कहना मत कि मैं मौन हूँ, खुद न समझूँ कौन हूँ।)

  • आँसू बहाना: वह अपने घर को याद करके अक्सर रोता है।

कवि यह सब इसलिए छिपाना चाहता है क्योंकि वह नहीं चाहता कि उसके परिवार वाले, विशेषकर उसके माता-पिता, उसकी सच्चाई जानकर दुखी हों। वह उन्हें यह विश्वास दिलाना चाहता है कि उनका बेटा जेल में भी मज़बूत, खुश और मज़े में है ताकि वे चिंता न करें।


कविता के आस-पास

प्रश्न 1. ऐसी पाँच रचनाओं का संकलन कीजिए जिसमें प्रकृति के उपादानों की कल्पना संदेशवाहक के रूप में की गई है।

उत्तर: प्रकृति के उपादानों को संदेशवाहक के रूप में उपयोग करने की परंपरा हिंदी साहित्य में बहुत पुरानी है। ऐसी पाँच रचनाएँ इस प्रकार हैं:

  1. मेघदूत (कालिदास): इसमें एक यक्ष बादलों (मेघ) को अपना दूत बनाकर अपनी प्रियतमा तक अपना विरह-संदेश भेजता है।

  2. पद्मावत (मलिक मुहम्मद जायसी): इसमें नागमती पक्षियों के माध्यम से राजा रत्नसेन तक अपना विरह-संदेश भेजती है। (पंक्ति: पिय सौं कहेहु सँदेसड़ा, हे भौंरा हे काग।)

  3. पवनदूती (अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'): इसमें राधा पवन (हवा) को अपना दूत बनाकर कृष्ण के पास मथुरा भेजती हैं।

  4. राम की शक्तिपूजा (सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'): इसमें पवनपुत्र हनुमान का संदेशवाहक के रूप में चित्रण है, जो प्रकृति के ही एक रूप हैं।

  5. हंस संदेश (कृष्ण काव्य): कई कवियों ने हंस को दूत बनाकर गोपियों का संदेश कृष्ण तक और कृष्ण का संदेश गोपियों तक पहुँचाया है।

प्रश्न 2. घर से अलग होकर आप घर को किस तरह से याद करते हैं? लिखें।

उत्तर: (यह प्रश्न छात्रों के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित है। यहाँ एक उदाहरण दिया जा रहा है।)

घर से अलग होकर, चाहे वह पढ़ाई के लिए हो या नौकरी के लिए, घर की याद आना स्वाभाविक है। मैं जब घर से दूर हॉस्टल में रहता हूँ, तो घर की हर छोटी-बड़ी बात याद आती है। माँ के हाथ का बना खाना, पिताजी का प्यार भरा अनुशासन और उनकी चिंता, भाई-बहनों के साथ लड़ना-झगड़ना और फिर एक हो जाना, वो शरारतें और मस्ती बहुत याद आती हैं। त्योहारों के समय घर की कमी सबसे ज़्यादा खलती है। जब सब लोग अपने-अपने घर जाते हैं, तो अकेलापन और भी बढ़ जाता है। बीमार पड़ने पर माँ की देखभाल और पूरे परिवार का ध्यान रखना, यह सब घर से दूर रहकर एक सपने जैसा लगता है। संक्षेप में, घर सिर्फ ईंट-पत्थर का मकान नहीं, बल्कि रिश्तों और भावनाओं का एक बंधन है, जिसकी कीमत उससे दूर जाकर ही समझ आती है।


अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1. "मायके आई बहिन के लिए कवि ने घर को 'परिताप का घर' क्यों कहा है?"

उत्तर: कवि ने मायके आई बहन के लिए घर को 'परिताप का घर' कहा है, जिसके गहरे और भावुक कारण हैं। 'परिताप' का अर्थ होता है - अत्यधिक दुःख, संताप या कष्ट।

  1. भाई की अनुपस्थिति: बहनें मायके बहुत खुशी और उम्मीदों के साथ आती हैं कि वे अपने माता-पिता और सभी भाई-बहनों से मिलेंगी। लेकिन जब कवि की बहन घर आई, तो उसे पता चला कि उसका एक भाई (कवि) स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण जेल में बंद है। घर में एक भाई की कमी उसे बहुत दुःखी कर देती है।

  2. माता-पिता का दुःख: बहन घर आकर यह भी देखती है कि उसके एक बेटे के जेल में होने के कारण माता-पिता और अन्य भाई-बहन भी बहुत दुखी हैं। घर का पूरा माहौल गमगीन है।

  3. खुशी का दुःख में बदलना: बहन मायके जिस खुशी के लिए आई थी, वह खुशी अपने भाई को न पाकर और परिवार को दुखी देखकर गहरे दुःख में बदल जाती है।

इन्हीं कारणों से, जो घर बहन के लिए सुख और आनंद का केंद्र होना चाहिए था, वही घर आज उसके लिए 'परिताप' यानी अत्यधिक दुःख का घर बन गया है।

प्रश्न 2. 'घर की याद' कविता का प्रतिपाद्य (मूल भाव) स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:
'घर की याद' कविता का प्रतिपाद्य या मूल भाव घर से दूर रहने की पीड़ा और पारिवारिक संबंधों की गहरी अनुभूति को व्यक्त करना है। इस कविता के माध्यम से कवि भवानी प्रसाद मिश्र ने निम्नलिखित भावों को प्रस्तुत किया है:

  1. घर की स्मृतियाँ और विरह की पीड़ा: कविता का केंद्रीय भाव घर की यादों से उपजी पीड़ा है। कवि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान जेल में बंद हैं और सावन की बरसती रात में उन्हें अपने घर, अपने परिवार के सदस्यों की एक-एक करके याद आती है। यह स्मृति उन्हें भावुक और व्याकुल कर देती है।

  2. पारिवारिक संबंधों की मधुरता: कवि अपने परिवार के सदस्यों—पिता, माँ, भाई और बहन—के साथ अपने गहरे और स्नेहपूर्ण संबंधों को याद करते हैं। यह कविता पारिवारिक स्नेह की महत्ता को स्थापित करती है।

  3. स्वतंत्रता आंदोलन का संदर्भ: यह कविता केवल एक व्यक्तिगत पीड़ा की कविता नहीं है, बल्कि यह उस दौर के हजारों स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी भी कहती है, जो अपने परिवार से दूर जेलों में बंद थे।

  4. संवेदना छिपाने की विवशता: कविता का अंत एक गहरी विवशता को दर्शाता है। कवि अपनी पीड़ा और कमजोरी को अपने परिवार से छिपाना चाहता है, ताकि वे दुखी न हों। वह सावन को दूत बनाकर यह संदेश भेजता है कि वह जेल में खुश है।

संक्षेप में, 'घर की याद' कविता का प्रतिपाद्य घर से विस्थापन की पीड़ा, पारिवारिक स्नेह की ताकत और देशप्रेम के लिए किए गए त्याग के बीच एक व्यक्ति के अंतर्मन के संघर्ष को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करना है।

कक्षा - 11 अपू के साथ ढाई साल



कक्षा 11 (आरोह) - पाठ: अपू के ढाई साल

(लेखक: सत्यजित राय)

NCERT प्रश्न-उत्तर


पाठ के साथ

प्रश्न 1. 'पथेर पांचाली' फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?

उत्तर: 'पथेर पांचाली' फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक चलने के मुख्य कारण निम्नलिखित थे:

  1. पैसों की कमी: लेखक सत्यजित राय तब एक विज्ञापन कंपनी में काम करते थे। फ़िल्म बनाने के लिए उनके पास पर्याप्त पैसे नहीं थे। जब उनके पास पैसे इकट्ठे हो जाते, तब वे शूटिंग करते और पैसे खत्म होने पर शूटिंग रोकनी पड़ती थी।

  2. नौकरी के साथ काम करना: लेखक अपनी नौकरी के कारण केवल शनिवार-रविवार या छुट्टियों में ही शूटिंग कर पाते थे।

  3. कलाकारों की समस्या: फ़िल्म में काम करने वाले कलाकार ज़्यादातर नए थे। बच्चों (अपू और दुर्गा) की उम्र बढ़ रही थी, और अन्य कलाकारों को भी एक साथ इकट्ठा करना मुश्किल होता था।

  4. तकनीकी पिछड़ापन: उस समय आज की तरह आधुनिक उपकरण नहीं थे, जिससे काम में ज़्यादा समय लगता था।

इन्हीं सब बाधाओं के कारण फ़िल्म को पूरा होने में ढाई साल का लंबा समय लग गया।

प्रश्न 2. अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से 'कंटिन्युइटी' नदारद हो जाती। इस कथन के पीछे क्या भाव है?

उत्तर: इस कथन के पीछे फ़िल्म निर्माण की एक महत्वपूर्ण तकनीक 'कंटिन्युइटी' (Continuity) को बनाए रखने का भाव है। कंटिन्यूइटी का अर्थ है 'निरंतरता'। इसका मतलब है कि फ़िल्म के अलग-अलग समय पर शूट किए गए दृश्यों को जब एक साथ जोड़ा जाए, तो वे ऐसे लगने चाहिए मानो एक ही समय पर हुए हों।

यह प्रसंग काशफूलों वाले दृश्य से जुड़ा है। लेखक ने अपू और दुर्गा का एक सीन काशफूलों के मैदान में शूट किया था। पैसे खत्म होने के कारण बाकी का सीन वे तुरंत शूट नहीं कर पाए। जब वे लगभग सात महीने बाद दोबारा उस जगह पर गए, तो सारे काशफूल जानवर खा चुके थे। अगर वे बिना काशफूलों के वह सीन शूट कर लेते, तो पहले आधे सीन (जिसमें सफेद काशफूल थे) और दूसरे आधे सीन (जिसमें मैदान खाली था) में कोई मेल नहीं बैठता। इससे दर्शक तुरंत गलती पकड़ लेते और दृश्य का प्रभाव खत्म हो जाता। इसीलिए, कंटिन्यूइटी बनाए रखने के लिए उन्हें अगले साल तक इंतज़ार करना पड़ा जब तक कि मैदान में दोबारा काशफूल नहीं उग आए।

प्रश्न 3. किन दो दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है?

उत्तर: दो दृश्य जिनमें दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है, वे निम्नलिखित हैं:

  1. 'भूलो' नामक कुत्ते का दृश्य: एक दृश्य में भूलो (कुत्ते) को अपू की माँ द्वारा फेंके गए भात को खाना था। लेकिन सूरज की रोशनी और पैसे खत्म होने के कारण उस दिन यह शॉट पूरा नहीं हो सका। जब वे दोबारा उस लोकेशन पर गए, तो पता चला कि भूलो मर चुका है। सौभाग्य से, उन्हें वैसा ही दिखने वाला एक और कुत्ता मिल गया। फ़िल्म में बाकी का दृश्य उस नए कुत्ते के साथ फिल्माया गया। दर्शक फ़िल्म देखते समय यह अंतर पहचान नहीं पाते कि यह दो अलग-अलग कुत्ते हैं।

  2. श्रीनिवास नामक मिठाईवाले का दृश्य: फ़िल्म में श्रीनिवास नामक मिठाई बेचने वाले की भूमिका निभाने वाले व्यक्ति का भी शूटिंग के बीच में निधन हो गया। उनका एक ही दृश्य बाकी था। लेखक ने उनकी जगह पर उन्हीं जैसे कद-काठी के एक दूसरे व्यक्ति को लिया और कैमरे की तरफ़ उसकी पीठ करके बाकी दृश्य फिल्माया। इससे दर्शक यह नहीं जान पाते कि यह कोई और व्यक्ति है।

प्रश्न 4. 'भूलो' की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया? उसने फ़िल्म के किस दृश्य को पूरा किया?

उत्तर: 'भूलो' की जगह दूसरा कुत्ता इसलिए लाया गया क्योंकि मूल कुत्ते 'भूलो' की मृत्यु हो गई थी, जबकि उसका एक शॉट लेना बाकी रह गया था।

उस दूसरे कुत्ते ने फ़िल्म के उस दृश्य को पूरा किया जिसमें अपू की माँ सर्वजया, अपू को गमले में बचे हुए भात को खाने को देती है, जिसे अपू नहीं खाता। सर्वजया वह भात गमले से फेंक देती है और 'भूलो' को वह भात खाना होता है। मूल कुत्ते के साथ यहाँ तक का दृश्य फिल्मा लिया गया था, लेकिन भात खाने वाला शॉट नहीं हो पाया था। इसी शॉट को पूरा करने के लिए नए कुत्ते का इस्तेमाल किया गया।

प्रश्न 5. फ़िल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनसे जुड़े बाकी दृश्यों को उनके गुज़र जाने के बाद किस प्रकार फ़िल्माया गया?

उत्तर: फ़िल्म में श्रीनिवास की भूमिका एक घूम-घूमकर मिठाई बेचने वाले (मिठाईवाले) की थी। बच्चे (अपू और दुर्गा) उसके पीछे-पीछे दौड़ते हैं क्योंकि उनके पास मिठाई खरीदने के पैसे नहीं होते। यह दृश्य बच्चों की मासूम इच्छाओं और गरीबी को दिखाता है।

श्रीनिवास का किरदार निभाने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद, उनसे जुड़े बाकी दृश्यों को एक तरकीब से फिल्माया गया। लेखक ने श्रीनिवास जैसी ही कद-काठी वाले एक व्यक्ति को ढूँढ़ा। बाकी बचे दृश्य में कैमरे को उस नए व्यक्ति की पीठ की ओर रखकर शूटिंग की गई, जिससे उसका चेहरा दिखाई न दे। इस प्रकार, दर्शक यह अंतर नहीं पकड़ पाए और दृश्य पूरा हो गया।

प्रश्न 6. बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान किस प्रकार हुआ?

उत्तर: बारिश का दृश्य चित्रित करने में मुख्य मुश्किल पैसों की कमी थी। लेखक के पास पैसे नहीं थे और बरसात का मौसम शुरू होकर खत्म भी हो गया। वे शूटिंग नहीं कर पाए।

इसका समाधान प्रकृति ने स्वयं कर दिया। जब शरद ऋतु (अक्टूबर का महीना) चल रही थी और लेखक के पास पैसे भी आ गए थे, तब एक दिन अचानक आकाश में बादल छा गए और ज़ोरदार बारिश होने लगी। लेखक ने इस मौके का फायदा उठाया और तुरंत अपू और दुर्गा को लेकर बारिश का वह प्रसिद्ध दृश्य फिल्माया। इस अप्रत्याशित बारिश के कारण दृश्य बहुत स्वाभाविक बन गया और साउंडट्रैक में भी असली बारिश की आवाज़ का बहुत अच्छा प्रभाव आया।

प्रश्न 7. किसी फ़िल्म की शूटिंग करते समय फ़िल्मकार को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर: इस पाठ के आधार पर, एक फ़िल्मकार को शूटिंग के दौरान निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ता है:

  1. आर्थिक समस्या: फ़िल्म बनाने के लिए पैसों की कमी सबसे बड़ी समस्या होती है।

  2. कलाकारों की समस्या: सही कलाकारों का चयन करना, उनकी तारीख़ें मिलना, और बाल कलाकारों की बढ़ती उम्र जैसी समस्याएँ आती हैं।

  3. मौसम पर निर्भरता: आउटडोर शूटिंग के लिए सही रोशनी और मौसम का इंतज़ार करना पड़ता है, जैसे बारिश या धूप के लिए।

  4. लोकेशन की समस्या: दृश्यों के लिए सही लोकेशन ढूँढना और उसे बार-बार उसी स्थिति में पाना मुश्किल होता है (जैसे काशफूलों का गायब हो जाना)।

  5. कंटिन्युइटी बनाए रखने की चुनौती: दृश्यों की निरंतरता बनाए रखना एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।

  6. पशु-पात्रों के साथ काम करना: जानवरों को प्रशिक्षित करना और उनसे अभिनय करवाना बहुत मुश्किल होता है।

  7. अप्रत्याशित घटनाएँ: किसी कलाकार का बीमार पड़ना या मृत्यु हो जाना जैसी दुखद घटनाएँ भी काम को प्रभावित करती हैं।

  8. स्थानीय लोगों और भीड़ का नियंत्रण: शूटिंग के दौरान जमा होने वाली भीड़ को नियंत्रित करना भी एक समस्या है।